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इजरायली बमबारी में मारा गया इस देश का प्रधानमंत्री! दुनिया में मचा हड़कंप

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यमन की राजधानी सना में इजराइली हवाई हमलों ने तहलका मचा दिया है। इन हमलों में ईरान समर्थित हूती समूह के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहवी के मारे जाने की खबर है। इसके साथ ही हूती रक्षा मंत्री और अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारियों के हताहत होने की भी आशंका जताई जा रही है। यूरोन्यूज ने यमन और इजराइली रिपोर्टों के हवाले से यह सनसनीखेज जानकारी दी है।

इजराइली सेना का हमला

इजराइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने गुरुवार को हूती-नियंत्रित सना पर ताबड़तोड़ हमले किए। ये हमले हूतियों द्वारा फिलिस्तीनियों के समर्थन में बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में किए गए। इजराइली सेना ने दावा किया कि उसने राष्ट्रपति भवन सहित हूती सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। सना के अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 10 लोग मारे गए और 90 घायल हो गए।

अहमद अल-रहवी की मौत की पुष्टि?

यमनी समाचार आउटलेट अल-जुम्हुरिया के अनुसार, इजराइली हमलों के दौरान अहमद अल-रहवी की सना में अपने अपार्टमेंट में मौत हो गई। उनके कई सहयोगी भी इस हमले में मारे गए। इजराइली सेना ने बताया कि उसने हूतियों के एक सैन्य ठिकाने पर हमला किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि निशाना कौन था। यूरोन्यूज के मुताबिक, हूती नेता मोहम्मद अल-गमारी पहले भी एक इजराइली हमले में घायल हो चुके थे। इजराइल अभी भी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या हूती नेतृत्व में और मौतें हुई हैं।

रक्षा मंत्री और शीर्ष अधिकारी भी निशाने पर?

इजराइली अधिकारियों का मानना है कि इन हमलों में हूती रक्षा मंत्री मोहम्मद अल-अतीफी और चीफ ऑफ स्टाफ मुहम्मद अब्द अल-करीम अल-गमारी भी मारे गए। ये दोनों सना के बाहर एक कैबिनेट बैठक में मौजूद थे। ये हमले हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-गमारी के एक भाषण से ठीक पहले हुए, जो उस समय हमले की जगह पर नहीं थे। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सैन्य चीफ ऑफ स्टाफ जनरल इयाल जमीर के साथ मिलकर इन हमलों को मंजूरी दी थी।

काट्ज ने कड़ा बयान देते हुए कहा, “हमने हूतियों को चेतावनी दी थी कि अंधकार की महामारी के बाद ज्येष्ठ पुत्रों की महामारी आएगी। जो कोई इजराइल के खिलाफ हाथ उठाएगा, उसका हाथ काट दिया जाएगा।”

हूतियों और अमेरिका का समझौता

गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से हूतियों ने इजराइल पर बार-बार हमले किए और लाल सागर व अदन की खाड़ी में उन जहाजों को निशाना बनाया, जिन्हें वे इजराइल से जुड़ा मानते हैं। हूती समूह यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है और 2014 से युद्धग्रस्त इस देश में ईरान के प्रतिरोध अक्ष का हिस्सा है। ट्रंप प्रशासन ने मई में हूतियों के साथ एक समझौता किया था, जिसमें जहाजों पर हमले रोकने के बदले में हमले बंद करने की बात कही गई थी।

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